शनिवार, 5 जून 2010
दुआ माँगते है....
आजकल वो मेरी ख़ुशी की दुआ मांगते हैं।
जो मेरे दर्द को बाक़ायदा पहचानते हैं।
पहले तो बड़े प्यार से मेरी जाँ ले ली,
अब ख़ुदा से मेरी ख़ातिर साँसे मांगते है.
उनकी चाहत का इशारा भी ज़रा देखिये तो
खुद मेरी प्यास है और मुझसे घटा मांगते है।
हमारी नींद और ख़यालो को यूँ करके ज़बह,
करे सवाल की हम रात भर क्यूँ जागते हैं.
ख़ुदा बचाए मुझे ऐसे भले आशिकों से,
जो इश्क करते हैं फिर खुद ही दगा मांगते है।
तेरी याद आई
आज हर बात पर एक बात तेरी याद आई।
वो तनहा सी मुलाकात तेरी याद आई
जो निकली आँखों से तेरी और पंहुची दिल तक मेरे,
भरी वो अश्कों से सौगात तेरी याद आई।
तेरी नज़र का मेरे साथ दूर तक चलना
और जब छूटा था वो साथ तेरी याद आई।
चाहे फलक पे सितारों ने तेरा नाम लिखा
या के गहराती रही रात तेरी याद आई।
जो लड़ी तुने खुद से जंग-ए- मुहब्बत हर पल
उसमे जब हुई मेरी मात तेरी याद आई।
पढ़ ज़रा गौर से ताबीर मेरी कबर-ए- दिल की
लिखा है छूटी कायनात तेरी याद आई।
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