ज़िन्दगी कुछ नयी सी लगी,
खुद से अजनबी सी लगी,
हर तरफ शोर ही शोर था,
ख़ामोशी अनसुनी सी लगी,
चिराग-e-दिल में अँधेरा ही अँधेरा,
रोशनी बेवजह सी लगी,
खुद बा खुद झुक गया दर पे सर,
हसरते बंदगी सी लगी,
दास्ताँ-इ-जफा जो भी रूबरू,
हर कहानी सुनी सी लगी।
सांसो की सरगम उखड़ी यूँ,
मौत भी सुरमई सी लगी,
