शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

आजकल वो मेरी ख़ुशी की दुआ मांगते है जो मेरे दर्द को बाकायदा पहचानते हैं पहले तो बड़े प्यार से मेरी जाँ लेली अब खुदा से मेरी खातिर साँसे मांगते हैं ! उनकी चाहत का इशारा भी ज़रा देखिये तो, खुद मेरी प्यास है और मुझसे घटा मांगते हैं हमारी नींदों और ख्वाबो को जबह करके, किये सवाल के हम रात भर क्यों जागते है